शहर अध्यक्ष की चूक, भाजपा की फजीहत! मंडल अध्यक्ष कोर्ट पहुंचा

अनुशासन समिति की कार्रवाई की अनुशंसा के बावजूद मामला लटका रहा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ तक पहुंची शहर संगठन की कार्यशैली की आंच

जयपुर, 11 अगस्त 2026(न्याय स्तंभ)।भाजपा को अनुशासन और ‘पार्टी विद डिफरेंस’ के लिए जाना जाता है, लेकिन जयपुर के चांदपोल मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति का विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। एक ही पद पर दो दावेदारों की स्थिति के बीच कपिल गुर्जर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और भाजपा प्रदेश नेतृत्व को नोटिस जारी हुआ है। कपिल गुर्जर ने कोर्ट में अपने पक्ष में कहा है कि उन्हें मंडल अध्यक्ष पद से हटाया नहीं गया और न ही उनके खिलाफ नियमानुसार कोई कार्रवाई की गई, इसके बावजूद कैलाश टेकेवाला को उसी पद पर नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने पार्टी के विधान और नियम-25 के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का भी हवाला दिया है।

अब इस पूरे विवाद की सीधी आंच जयपुर शहर अध्यक्ष अमित गोयल से होते हुए प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ तक पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, कपिल गुर्जर के खिलाफ शिकायतों के बाद पार्टी की अनुशासन समिति ने जांच की और कार्रवाई की अनुशंसा प्रदेश नेतृत्व को भेजी थी। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की ओर से भी कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए जाने के बावजूद शहर स्तर पर मामले को टाला जाता रहा। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यही वह बिंदु है जहां अब सवाल सीधे शहर अध्यक्ष अमित गोयल की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। जब अनुशासन समिति जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा कर चुकी थी, प्रदेश नेतृत्व की भी नजर मामले पर थी, तो फिर कपिल गुर्जर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर ऐसा क्या था कि मामला लंबा खिंचता रहा और बाद में कैलाश टेकेवाला की नियुक्ति ने पूरे विवाद को और उलझा दिया?

पार्टी के भीतर अब इसको लेकर असंतोष बढ़ने की चर्चा है। कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर प्रदेशाध्यक्ष स्तर से कार्रवाई के निर्देश थे और फिर भी शहर संगठन ने उसे आगे नहीं बढ़ाया तो क्या शहर अध्यक्ष प्रदेशाध्यक्ष से भी बड़े हो गए हैं? सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिस विवाद को संगठन के स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई से खत्म किया जा सकता था, वह अब अदालत तक पहुंच चुका है और प्रदेश नेतृत्व को जवाब देना पड़ रहा है।

चांदपोल विवाद ने फिलहाल सिर्फ एक मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को कटघरे में नहीं खड़ा किया है, बल्कि जयपुर शहर भाजपा में निर्णय लेने की प्रक्रिया, अनुशासनात्मक कार्रवाई और शहर व प्रदेश संगठन के बीच तालमेल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और क्या शहर संगठन की भूमिका की भी समीक्षा होती है।

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