निगम आयुक्त बोले—‘ट्रांसफर करवा दो’...भाजपा प्रदेशाध्यक्ष आए बैकफुट पर

“सुनी - सुनाई जुबां पर आई”

जयपुर। परकोटे में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर नगर निगम जयपुर हेरिटेज पहले ही सवालों के घेरे में है, लेकिन अब यह मामला भाजपा संगठन और प्रशासनिक ‘पावर गेम’ तक पहुंचता नजर आ रहा है। चर्चा का केंद्र बने हैं किशनपोल से भाजपा प्रत्याशी रहे चंद्रमोहन बटवाड़ा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा।

सूत्रों के मुताबिक, किशनपोल क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर बटवाड़ा लंबे समय से नगर निगम में शिकायतें कर रहे थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फाइलें शायद वही पुरानी सरकारी चाल चल रही थीं—“देखेंगे, करेंगे, जांच होगी”। बताया जाता है कि जब नगर निगम के सीईओ स्तर पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बटवाड़ा ने मामला सीधे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के सामने रखने का मन बनाया।

शुक्रवार को कथित तौर पर बटवाड़ा ने प्रदेशाध्यक्ष को अपने निवास पर बुलाया, जहां पहले से कुछ मंडल अध्यक्ष और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। माहौल राजनीतिक था, बातचीत संगठनात्मक थी, लेकिन असली मुद्दा परकोटे के अवैध निर्माणों का था। सूत्रों का दावा है कि कार्यकर्ताओं के बीच जोश में आए प्रदेशाध्यक्ष ने तुरंत नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा को फोन लगा दिया।

पहले औपचारिक बातचीत हुई, फिर मामला अवैध निर्माणों तक पहुंचा। लेकिन यहीं कहानी ने मोड़ ले लिया। चर्चा है कि आयुक्त की ओर से ऐसा जवाब आया जिसने कमरे का तापमान ही बदल दिया। कथित तौर पर आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि “शहर में अवैध निर्माण ऐसे ही चलते रहेंगे, मैं इन्हें नहीं रोक सकता, चाहें तो मेरा ट्रांसफर करवा दीजिए।”

सूत्रों के अनुसार, इस जवाब के बाद प्रदेशाध्यक्ष का तेवर अचानक नरम पड़ गया। यहां तक कि कथित तौर पर “ट्रांसफर दूर करवाने” जैसी बात भी हुई, मगर आयुक्त अपने रुख पर अड़े रहे।

कमरे में बैठे कार्यकर्ताओं के बीच फिर कानाफूसी शुरू हो गई—“जब प्रदेशाध्यक्ष की ही नहीं सुनी जा रही तो साधारण कार्यकर्ता की कौन सुनेगा?” कुछ ने तो कथित तौर पर यह तक कह दिया कि “जनता के काम ही नहीं करवा पा रहे, इससे अच्छा तो इस्तीफा देकर घर बैठ जाएं।”

अब सवाल यह है कि अगर एक अधिकारी के सामने संगठन का शीर्ष नेतृत्व ही बेबस नजर आए, तो फिर परकोटे की विरासत बचाने की लड़ाई आखिर कौन लड़ेगा?

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