“कोर्ट में केस, निगम में पोस्टिंग! 55 पन्नों की वायरल लिस्ट ने खोली सिस्टम को ठेंगा दिखाने वालों की पोल

2500 परिवारों के सपनों से हो रहा है खुला खेल


जयपुर, 10 फरवरी 2026(न्याय स्तंभ)। नगर निगम में इन दिनों एक 55 पन्नों की “वायरल लिस्ट” ने ऐसा भूचाल मचा दिया है कि उसकी गूंज सचिवालय से लेकर सफाई चौक तक सुनाई दे रही है। यह वही सूची बताई जा रही है जो वर्ष 2012 में नगर निगम की चयन समिति द्वारा तैयार की गई थी। सूची में दर्ज कई नाम आज 2018 की भर्ती के तहत निगम में बाकायदा नौकरी कर रहे हैं… लेकिन चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि उन्हीं लोगों के नियुक्ति संबंधी मामले आज भी न्यायालय में लंबित हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या इन लोगों ने कोर्ट में चल रहे अपने केस वापस नहीं लिए और चोरी-छिपे निगम में नौकरी पर “चढ़” गए? अगर हां, तो फिर अदालत में मामले जिंदा रखकर ये लोग किसकी नियुक्तियों पर ब्रेक लगाकर बैठे हैं?

सूत्र बताते हैं कि इन्हीं मामलों के कारण करीब 2500 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां अटकी हुई हैं। इनमें से कई लोग सालों से इंतज़ार करते-करते इस दुनिया से ही विदा हो चुके हैं, लेकिन निगम और सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
इधर, सफाई यूनियन के कुछ पदाधिकारी इस अराजकता में “चांदी कूटने” में लगे हैं। सोशल मीडिया ग्रुपों में खुलेआम संदेश वायरल हो रहे हैं— “आपका नाम लिस्ट में है? नौकरी लगवा देंगे!” और इसके बदले भोले-भाले बेरोज़गारों से मोटी रकम वसूली जा रही है।अब

अब सवाल उठता है—
जब 55 पेज की लिस्ट सोशल मीडिया पर घूम रही है, जब दलाल खुलेआम वसूली कर रहे हैं, जब लोग अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लुटा रहे हैं,
तो नगर निगम के अधिकारी आखिर किस नींद में सो रहे हैं? क्या इस लिस्ट की सत्यता जांचना इतना मुश्किल है?
या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं ताकि खेल चलता रहे?

यह सिर्फ भर्ती घोटाला नहीं,
यह 2500 परिवारों के भविष्य से खिलवाड़ है। नौकरी की चाहत में आने वाले लोगों ने निगम और सौदेबाजों से ये सवाल किया कि अब कब होगी कार्रवाई। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह चुप्पी खुद एक बहुत बड़े घोटाले की गवाही बन जाएगी।

ये जो 55 पेज की सूची है इसको अंतिम न समझे। जिस तरह से राजस्थान के और जिलों में ऐसे प्रकरणों पर भर्ती हुई है हम भी जयपुर में करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मेरी ऐसे लोगों को चेतावनी है कि वे भोले भाले लोगों को भ्रमित न करें नहीं तो उन पर कार्रवाई हो सकती है।

नंदकिशोर डंडोरिया, अध्यक्ष, सफाई कर्मचारी यूनियन

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