25 फरवरी को देशव्यापी ‘विरोध दिवस’ मनाएगा भारतीय मजदूर संघ

जयपुर, 24 फरवरी 2026 (न्याय स्तंभ)। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने 21वें अखिल भारतीय अधिवेशन, पुरी (ओडिशा) के आह्वान पर 25 फरवरी 2026 को देशभर में ‘विरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की है। संगठन के अनुसार, सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, रैली, गेट मीटिंग और काली पट्टी धारण कर केंद्र एवं राज्य सरकारों के समक्ष श्रमिकों की लंबित समस्याओं को उठाया जाएगा।
बीएमएस का कहना है कि मिड-डे मील, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अत्यंत कम मानदेय पर लंबे समय से काम करना पड़ रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘योजना कर्मी’ का दर्जा देकर उनसे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि आठ राज्यों में राष्ट्रीय वस्त्र निगम (NTC) की मिलों के श्रमिकों को महामारी के बाद से केवल 50 प्रतिशत वेतन मिल रहा है और पिछले दस महीनों से वेतन बकाया है। वहीं रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) के कर्मचारियों को पिछले 32 महीनों से वेतन नहीं मिला है। विद्युत क्षेत्र के कर्मचारी डिस्कॉम के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं, जबकि ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम 1,000 रुपये पेंशन से पेंशनभोगी परेशान हैं। बैंक कर्मचारी भी पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
बीएमएस ने स्पष्ट किया है कि विरोध दिवस के दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री एवं संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

संयुक्त प्रमुख मांगें

बीएमएस ने एक साथ अपनी मांगें रखते हुए कहा है कि देशभर में श्रम कानूनों का सख्ती से और सार्वभौमिक पालन सुनिश्चित किया जाए; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 एवं व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 में श्रमिकों की चिंताओं का समाधान किया जाए; भारतीय श्रम सम्मेलन को शीघ्र बुलाकर त्रिपक्षीय समितियों का पुनर्गठन किया जाए; ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रतिमाह की जाए तथा इसे महंगाई राहत और आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए; ईएसआई और ईपीएफ की कवरेज सीमा बढ़ाते हुए ईएसआईसी की वेतन सीमा 21,000 से 42,000 तथा वीजीपीएफ की सीमा 15,000 से 30,000 की जाए; भुगतान बोनस अधिनियम, 1965 के अंतर्गत बोनस पात्रता सीमा वर्तमान वेतन स्तर के अनुरूप बढ़ाई जाए; विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 133 के अनुसार त्रिपक्षीय समझौतों को लागू कर कर्मचारियों की सेवा शर्तें, पेंशन और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए; योजना कर्मियों एवं संविदा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए; तथा सामान्य भर्ती पर लगे प्रतिबंध को हटाकर रोजगार की गारंटी और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन लंबित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

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