ज़िंदा घर लौटना ही सबसे बड़ी उपलब्धि! RAS अफसर पंकज ओझा की पोस्ट से मचा बवाल

"सरकार में रहकर सरकार पर सवाल! अब क्या आम नागरिक की तरह अफसर पर होगी कार्रवाई?

 

(मतीष पारीक)

जयपुर, 08 जुलाई 2026(न्याय स्तंभ)। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के वरिष्ठ अधिकारी पंकज ओझा एक बार फिर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने ऐसी पोस्ट साझा की है, जिसने सिर्फ आमजन ही नहीं बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोस्ट में लिखा गया है कि "IAS निकालना, IIT करना या किसी बड़ी कंपनी का CEO बनना सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि इस देश में सिस्टम की लापरवाही, टूटी सड़कों, हादसों, अपराध और नफरत से बचते हुए शाम को ज़िंदा घर लौट आना ही सबसे बड़ा अचीवमेंट है।" यह संदेश सीधे तौर पर देश की व्यवस्था, प्रशासनिक तंत्र और शासन व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी करता नजर आता है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यह टिप्पणी किसी आम नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता या विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है। ऐसे अधिकारी, जो स्वयं वर्षों तक शासन-प्रशासन का हिस्सा रहे हैं और प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

यदि व्यवस्था इतनी ही लापरवाह है, तो क्या उसमें प्रशासनिक अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? आखिर जिस "सिस्टम" पर उंगली उठाई जा रही है, उसी सिस्टम के संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी प्रशासनिक अधिकारियों के कंधों पर होती है। ऐसे में यह पोस्ट कहीं न कहीं अपनी ही कार्यप्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार पर अप्रत्यक्ष सवाल खड़े करती दिखाई देती है।

सरकारी सेवा आचरण नियम भी अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियों से बचें, जिनसे सरकार या प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर अनावश्यक विवाद खड़ा हो। ऐसे में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी को सोशल मीडिया पर इस प्रकार के राजनीतिक या व्यवस्था संबंधी संदेश साझा करने चाहिए?

लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को है, लेकिन जब कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक मंच से व्यवस्था की कमियों पर इस अंदाज में टिप्पणी करता है, तो यह केवल व्यक्तिगत राय नहीं रह जाती, बल्कि उसे सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर एक आधिकारिक दृष्टिकोण के रूप में भी देखा जा सकता है।

अब देखना यह होगा कि यह पोस्ट केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति मानी जाएगी या फिर सरकार और कार्मिक विभाग इस पर कोई संज्ञान भी लेते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पंकज ओझा की यह सोशल मीडिया पोस्ट प्रशासनिक हलकों में नई बहस जरूर छेड़ गई है।

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