तकनीकी खराबी' या ट्रांसफर खेल की नई पटकथा? आखिर अंतिम दिन ही क्यों टूटी शिक्षा विभाग की नींद!

20 जुलाई से भेजी गई परिवेदनाएं अचानक "ओपन" नहीं हुईं! अब नया ई-मेल, नया आदेश और हजारों कार्मिक फिर लाइन में... आखिर जिम्मेदार कौन?

बीकानेर, 24 जुलाई 2026(न्याय स्तंभ)। राजस्थान शिक्षा विभाग के तबादला प्रकरण में एक नया मोड़ सामने आया है। निदेशालय ने 24 जुलाई को जारी आदेश में साफ लिखा है कि पहले जिस जीमेल आईडी पर परिवेदनाएं मंगवाई गई थीं, वे "तकनीकी कारणों" से खुल नहीं सकीं। अब कार्मिकों को दोबारा अलग-अलग आधिकारिक ई-मेल आईडी पर आवेदन भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि…

अगर तकनीकी समस्या थी तो 20 जुलाई से लेकर अंतिम दिन तक विभाग क्या करता रहा?

क्या विभाग के पास यह जानने की कोई व्यवस्था नहीं थी कि हजारों कर्मचारी जिस ई-मेल पर आवेदन भेज रहे हैं, वह काम भी कर रही है या नहीं?

या फिर…

तकनीकी कारण सिर्फ एक बहाना है और असली कहानी कहीं और लिखी जा रही है?

सूत्रों की मानें तो ट्रांसफर सूची को लेकर सत्ता के गलियारों और शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच खींचतान चल रही है। चर्चा यहां तक है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से आई कुछ अनुशंसित सूचियों पर विभाग के अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कर दीं। यहां तक कि सचिवालय पहुंची एक सूची भी वापस लौटाए जाने की चर्चा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने जा रहे निदेशक सीताराम जाट हर सूची का बारीकी से परीक्षण कर रहे हैं और किसी भी विवादित नाम पर बिना संतुष्टि के आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि सत्ता के कुछ स्तरों से अपनी पसंद के तबादलों का दबाव बनाया जा रहा है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब सवाल यह है कि…

अगर तकनीकी खराबी थी तो उसका पता अंतिम दिन ही क्यों चला?

क्या विभाग के आईटी सिस्टम की कोई निगरानी नहीं थी?

हजारों कर्मचारियों का समय और मानसिक परेशानी कौन लौटाएगा?

पहले भेजे गए ई-मेल पर विचार नहीं होगा, इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

क्या यह पूरा घटनाक्रम ट्रांसफर प्रक्रिया को रीसेट करने की कोशिश है?

"तकनीकी कारण"—यह दो शब्द इस पूरे आदेश का सबसे कमजोर और सबसे बड़ा हिस्सा बन गए हैं। क्योंकि विभाग ने यह नहीं बताया कि आखिर खराबी क्या थी? सर्वर बैठ गया था? जीमेल ने मेल लेना बंद कर दिया था? स्टोरेज भर गया था? पासवर्ड की समस्या थी? या फिर कोई और प्रशासनिक कारण था?

यदि हजारों कर्मचारियों के आवेदन सचमुच नहीं खुले, तो यह केवल तकनीकी चूक नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षा विभाग इस कथित "तकनीकी खराबी" का विस्तृत स्पष्टीकरण देता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

क्योंकि सवाल सिर्फ ई-मेल बदलने का नहीं है... सवाल यह है कि कहीं ट्रांसफर की पटकथा बदलने के लिए तो ई-मेल नहीं बदला गया?

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