क्या बदलने वाला है राजस्थान भाजपा का नेतृत्व? कैलाश चौधरी के समर्थन में सक्रिय हुआ बड़ा धड़ा
बंगाल जीत, ओबीसी समीकरण और केंद्रीय नेतृत्व से करीबी को बनाया जा रहा आधार
(मतीष पारीक)
जयपुर, 16 जून 2026(न्याय स्तंभ)।राजस्थान भाजपा में संगठनात्मक बदलाव को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में किसान मोर्चा की जिम्मेदारी संभाल रहे कैलाश चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए सक्रिय बताया जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कैलाश चौधरी के समर्थन में जुटे नेता उनके हालिया संगठनात्मक प्रदर्शन को बड़ा आधार बना रहे हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी चुनावी सफलता के बाद समर्थक इसे उनके नेतृत्व और रणनीतिक क्षमता से जोड़कर दिल्ली तक मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा का एक समूह वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की कार्यशैली और संगठनात्मक कमियों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व को फीडबैक दे रहा है। हालांकि इन दावों की न्याय स्तंभ पुष्टि नहीं करता है।
कैलाश चौधरी के समर्थकों का सबसे बड़ा तर्क है कि उनके नेता की पहुंच सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक है। उनके समर्थक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनके मजबूत संबंधों को आधार बताते हुए तर्क दे रहे हैं कि इस वक्त राजस्थान में ओबीसी जैसे बड़े वर्ग को साथ लेकर चलने की कवायद चल रही है जिसमें कैलाश चौधरी फिट बैठते हैं।
हालांकि भाजपा बड़े संगठनात्मक फैसले केवल लॉबिंग के आधार पर नहीं होते, बल्कि सामाजिक समीकरण, आगामी चुनावी रणनीति, संगठन पर पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के दीर्घकालिक विजन को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल समर्थकों की सक्रियता है या फिर राजस्थान भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की कोई बड़ी पटकथा लिखी जा रही है। यदि इसमें सच्चाई है तो यह महज चर्चा नहीं बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को चुनौती देने की कवायद शुरू हो चुकी है । भाजपा के लिए ये अच्छा संकेत नहीं है। आने वाले दिनों में दिल्ली की गतिविधियां इस चर्चा को और तेज कर सकती हैं। अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इतना तय है कि प्रदेश भाजपा के भीतर हलचल तेज हो गई है और गुटबाजी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव, 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।