जयपुर में ‘होर्डिंग वॉर’ – एक ही पार्टी, अपने ही नेता… और शहर बना पोस्टर नगरी!

जयपुर, 30 जनवरी 2026(न्याय स्तंभ)।  जयपुर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक से ज़्यादा अगर कुछ दिख रहा है, तो वो हैं किंग साइज होर्डिंग। चेहरे वही… पार्टी वही… लेकिन टक्कर ज़बरदस्त!

जी हां, राजधानी जयपुर में भाजपा के नवनियुक्त पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण कार्यक्रम चल रहे हैं और उसी के साथ शुरू हो गया है — “होर्डिंग वॉर – अपने ही अपनों के खिलाफ!”

भाजपा प्रदेश कार्यालय के आसपास का इलाका अब किसी राजनीतिक प्रदर्शनी से कम नहीं लगता। हर खंभा, हर दीवार, हर बिजली का पोल चीख-चीख कर बता रहा है – “देखो, हमारा नेता सबसे बड़ा है!”

शहर या पोस्टर गैलरी?
नगर निगम जयपुर आम दुकानदार को एक पोस्टर लगाने पर चालान थमा देता है, लेकिन यहां… 50-50 फीट के होर्डिंग
बिना अनुमति, बिना टैक्स, बिना डर!
सवाल उठता है – क्या ये होर्डिंग ‘राजनीतिक वीआईपी पास’ लेकर आए हैं? या फिर निगम के अफसरों को इन पर कार्रवाई करते हुए राजनीतिक एलर्जी हो जाती है?

सत्ता की हवा, कार्रवाई गायब
जब सरकार अपनी हो, तो शायद होर्डिंग भी “सरकारी मेहमान” बन जाते हैं।
न कोई नोटिस, न कोई जुर्माना, न कोई हटाने की हिम्मत। और अगर कोई गरीब बैनर लग जाए – तो तुरंत बुलडोज़र तैयार!

आसपास रहने वालों की पीड़ा
भाजपा कार्यालय के आसपास रहने वाले लोग अब परेशान हैं। किसी की दुकान का बोर्ड ढक गया, किसी के घर की खिड़की पर नेता जी मुस्कुरा रहे हैं, कहीं घरों के सामने ही बड़े बड़े होर्डिंग से पूरा मकान ही ढक गया, कहीं स्कूल के सामने ही लगा दिए बड़े होर्डिंग ,तो कहीं बिजली के तारों पर होर्डिंग टंगा मौत का न्योता बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है –
“हमें सड़क नहीं दिखती,
सूरज नहीं दिखता, बस नेताओं के चेहरे दिखते हैं!” राजनीति का असली पोस्टर
ये सिर्फ होर्डिंग की लड़ाई नहीं,
ये है – नेताओं के बीच नंबर वन बनने की जंग।
 

एक ही पार्टी,
एक ही सरकार, लेकिन प्रचार ऐसा जैसे चुनाव दुश्मनों से नहीं, अपने ही साथ लड़ा जा रहा हो।

जयपुर आज पूछ रहा है –
“शहर सुंदर बनाना ज़रूरी है
या नेताओं को खुश करना?”
और जवाब शायद…
होर्डिंगों में टंगा हुआ हैं!

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