“जब सैया भए कोतवाल…”: पार्किंग विवाद से फिर घिरी BJP की महिला नेत्री , रसूख के दम पर पड़ोसियों को परेशान करने के आरोप

जयपुर, 07 मई  2026(न्याय स्तंभ)। राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma लगातार भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करते हैं। लेकिन राजधानी जयपुर में सामने आ रहे एक के बाद एक विवाद अब सवाल खड़े करने लगे हैं कि क्या सत्ता के नशे में कुछ स्थानीय नेता सरकार की छवि को खुद ही नुकसान पहुंचाने में लगे हैं?

ताजा मामला जयपुर शहर की एक भाजपा पदाधिकारी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन पर अपने ही अपार्टमेंट में राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर पड़ोसियों को परेशान करने के आरोप लगे हैं। रहवासियों का दावा है कि संबंधित महिला ने बेसमेंट पार्किंग को निजी गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रखा है, जिससे अन्य लोगों को परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं, मेंटेनेंस और अपार्टमेंट नियमों की बात उठाने पर कथित तौर पर राजनीतिक पहुंच का दबाव बनाया जाता है।

हालांकि, यह भी सच है कि अब तक कोई भी निवासी खुलकर कैमरे या सार्वजनिक मंच पर सामने आने को तैयार नहीं हुआ है। लोग सिर्फ दबी जुबान में अपनी परेशानी बता रहे हैं। ऐसे में “न्याय स्तंभ” इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। यह खबर स्थानीय सूत्रों, सुनवाई में आए तथ्यों और कथित रूप से प्रताड़ित लोगों द्वारा बताई गई बातों के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सत्ता का प्रभाव क्या अब आम लोगों के लिए डर का कारण बनता जा रहा है? क्योंकि आरोप यह भी हैं कि विरोध करने वालों को “ऊपर तक पहुंच” और “बड़े नेताओं” का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है। ऐसे में लोगों के बीच अब यह कहावत भी चर्चा में है—

“जब सैया भए कोतवाल, तो डर काहे का…”

दरअसल, यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में जयपुर शहर की ही एक भाजपा नेत्री पर सिविल लाइंस क्षेत्र में एक प्लॉट पर कब्जा करने के आरोपों ने भी राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई थी। अब दूसरा मामला भी जयपुर शहर भाजपा से जुड़ी एक पदाधिकारी का सामने आने से स्थानीय संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष से पहले अब जनता ही पूछने लगी है कि अगर सत्ता से जुड़े लोग ही अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नियमों को ताक पर रखेंगे, तो फिर आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? मुख्यमंत्री की “जीरो टॉलरेंस” नीति और जमीनी स्तर पर नेताओं के व्यवहार के बीच का यह विरोधाभास अब सरकार और संगठन—दोनों की किरकिरी करवा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर 17 दिसंबर 2025 को संबंधित थाने, उपमुख्यमंत्री Diya Kumari के कार्यालय और जयपुर शहर भाजपा जिला अध्यक्ष को शिकायत भी दी गई थी। लेकिन शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

अब सवाल सिर्फ एक अपार्टमेंट या पार्किंग विवाद का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या जयपुर शहर भाजपा के कुछ चेहरे सत्ता की ताकत को “सेवा” नहीं बल्कि “दबाव” का माध्यम बना रहे हैं? और अगर यही हाल रहा, तो आने वाले नगर निगम चुनावों में जनता इसका जवाब किस तरह देगी — यह देखने वाली बात होगी।

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