“एक हाथ से कर वसूली, दूसरे हाथ से करोड़ों की लूट! स्पैरो घोटाले में नगर निगम बेनकाब”
जयपुर। एक ओर नगर निगम जयपुर आम नागरिकों से बकाया गृहकर और नगरीय विकास कर (UD Tax) वसूलने के लिए वार्ड-वार शिविर लगाकर “जयपुर के विकास में भागीदार बनने” की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी कर प्रणाली को संभाल रही निजी फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक पर गलत कर निर्धारण, मनमानी नोटिस और करोड़ों के राजस्व नुकसान के गंभीर आरोप शहर में भूचाल ला रहे हैं। सवाल यह है कि जब आम जनता से हर रुपया सख्ती से वसूला जा रहा है, तो जिस एजेंसी पर टैक्स कलेक्शन और डेटा प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, उसके कथित खेल पर नगर निगम आंख मूंदे क्यों बैठा है?
व्यापार मंडलों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, बीते छह वर्षों में UD Tax के नाम पर जयपुर को 125 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। आरोप है कि स्पैरो सॉफ्टटेक को GIS सर्वे और IT पोर्टल विकसित करना था, लेकिन न तो पूरा डेटा तैयार हुआ और न ही कोई प्रभावी पोर्टल। इसके बावजूद उसी अधूरी व्यवस्था के आधार पर भवन मालिकों और छोटे व्यापारियों को भारी-भरकम टैक्स नोटिस थमा दिए गए। कई मामलों में तो ऐसे परिसरों को भी नोटिस भेजे गए जो नियमों के दायरे में आते ही नहीं थे। व्यापारी दफ्तर पहुंचे तो कथित तौर पर “सौदेबाजी” कर नोटिस रद्द कर दिए गए—यानी कर व्यवस्था को उगाही का औजार बना दिया गया।
अब इसी पृष्ठभूमि में नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी द्वारा कर बकायादारों पर कुर्की और छूट योजनाओं के साथ शिविर लगाए जा रहे हैं। मानसरोवर, सांगानेर, आदर्श नगर, किशनपोल, झोटवाड़ा से लेकर मालवीय नगर तक आम लोगों से दस्तावेज लेकर कर वसूली की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब आधार ही गलत कर निर्धारण का है, तो शिविरों में वसूला जा रहा टैक्स कितना वैध है? जिन भवन मालिकों को स्पैरो की गलत गणनाओं से परेशान किया गया, उन्हें राहत कौन देगा?
खुद नगर निगम ने स्पैरो सॉफ्टटेक को कारण बताओ नोटिस दिए, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उलटे चर्चा है कि नए टेंडर इस तरह बनाए जा रहे हैं कि वही फर्म फिर से सिस्टम में घुस सके। 125 करोड़ के कथित राजस्व रिसाव पर चुप्पी साधे अधिकारी आखिर किसे बचा रहे हैं?
जनता से हर रुपये की सख्ती से वसूली और दूसरी तरफ संदिग्ध फर्म को संरक्षण—यह दोहरा चेहरा अब जयपुर के अफसरों को कठघरे में खड़ा कर रहा है। सवाल सीधा है: क्या कर शिविर सिर्फ आमजन पर दबाव बनाने का जरिया हैं, या पहले उस सिस्टम को साफ किया