डीएलसी दरों में 40% तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव का क्रेडाई ने किया विरोध, सरकार से पुनर्विचार की मांग
जयपुर, 10 जुलाई 2026(न्याय स्तंभ)।राज्य सरकार द्वारा डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी किए जाने की चर्चाओं के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख संगठन क्रेडाई राजस्थान ने इसका कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि बिना व्यापक सर्वे, बाजार मूल्यांकन और जनप्रतिनिधियों से राय लिए डीएलसी दरों में इतनी बड़ी वृद्धि करना न केवल अव्यावहारिक होगा बल्कि इससे आमजन, रियल एस्टेट उद्योग और राज्य के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
क्रेडाई राजस्थान ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सामान्यतः डीएलसी दरों का निर्धारण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक बाजार कीमतों का अध्ययन कर किया जाता है। लेकिन इस बार समाचारों के अनुसार बिना गुण-दोषों का परीक्षण किए सभी आवासीय, व्यावसायिक और अन्य संपत्तियों की डीएलसी दरों में एक समान वृद्धि प्रस्तावित की जा रही है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
संगठन ने बताया कि वर्ष 2024 में राज्य सरकार पहले ही डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि कर चुकी है। इसके बाद अक्टूबर 2025 में सड़क की चौड़ाई के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में 10, 15 और 20 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि लागू की गई। वहीं निर्माण दरों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर भी स्टांप ड्यूटी और संपत्ति खरीद की लागत पर पड़ चुका है। ऐसे में एक और बड़ी बढ़ोतरी से रियल एस्टेट कारोबार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
क्रेडाई राजस्थान के चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती निर्माण लागत के कारण रियल एस्टेट क्षेत्र पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यदि डीएलसी दरों में बिना विस्तृत अध्ययन के भारी वृद्धि की जाती है तो इससे उद्योग में मंदी आएगी, रोजगार के अवसर घटेंगे और अंततः सरकार के राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
संगठन के अध्यक्ष रविन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि डीएलसी दरें कई प्रकार के करों और शुल्कों का आधार होती हैं। इनके बढ़ने से आम नागरिक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वहीं महासचिव आशीष अग्रवाल ने कहा कि पहले डीएलसी दरों में संशोधन से पहले उद्योग और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया जा रहा है।
क्रेडाई राजस्थान ने राज्य सरकार से मांग की है कि डीएलसी दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि से पहले प्रदेशभर में वास्तविक बाजार मूल्यों का विस्तृत सर्वे कराया जाए, सभी संबंधित पक्षों और जनप्रतिनिधियों से राय ली जाए तथा उसके बाद ही व्यावहारिक और संतुलित दरें लागू की जाएं, ताकि रियल एस्टेट क्षेत्र, रोजगार और आम नागरिकों के हित सुरक्षित रह सकें।